महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री: आर्यभट्ट 🧠
+-* महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट--
परीचय:-
प्राचीन भारत ने विशव को कई महान गणितज्ञ और वैज्ञानिक दिए है उन महान विभुतीयो मे एक नाम है आर्यभट्ट , जिन्होंने गणित और खगोलशास्त्र मे योगदान दिया उनका ज्ञान आज भी पुरी दुनीया के लिए प्रेरणा है|
🧠आर्यभट्ट का जीवन:-
आर्यभट्ट का जन्म 476 ई. सा. पूर्व मे माना जाता है की उनका जन्म कुसुमपुर ( पटना बिहार) मे हुआ था उन्होंने कम उम्र मे ही गणित और खगोलशास्त्र मे रूचि दिखाना सुरु कर दिया|
📕 प्रमुख पुस्तक - आर्यभट्ट :-
आर्यभट्ट की सबसे प्रसीद्ध पुस्तक` अर्यभट्टीय, है जिसमे उन्होंने गणित और खोगल के जटिल सिद्धांतों को सरल भाषा मे समझाया है, यह चार भागो मे विभाजित है -
• गीतिकपाद ( समय और खगोल की गढ़ना)
• गणितपाद ( अंकगणित और बीजगणित)
• कालक्रियापद ( काल की गढ़ना)
• गोलपाद ( गृहों की गती और गोल पृथ्वी की गढ़ना)
🔢 गणित मे योगदान :-
• शून्य के स्पष्ट समझ और उपयोग
• π (पाई)का मान3.1416 के करीब बताया
• त्रिकोणमीती की सुरुवात sin, cos... जैसे शब्द का प्रयोग
• वर्गमूल, घनमूल और समीकरण हल करने की विधीयाँ
खगोलशास्त्र मे योगदान;-
• पृथ्वी अपने धुरी पर घुमती है यह उन्होंने बहुत पहले बता दिया था
• सौर और चंद्र ग्रहण वैज्ञानिक व्याख्या
• ग्रह की गती और समय की गढ़ना के सटीक तरीके
• उन्होंने बतायाकी दिन और रात पृथ्वी की गती से होते है ना कि bसूर्य की घूमने की वजह से
आधुनिक भारत मे सम्मान :-
• भारत मे पहले उपग्रह का नाम आर्यभट्ट रखा गया ( लॉन्च 1975)
• स्कूलों और विश्वविधालयो मे उनके सिद्धांत आज भी पढ़ाए
जाते है
• वैज्ञानिको के लिए वे प्रेरणा श्रोत है
✅ निष्कर्ष:-
आर्यभट्ट केवल एक गणितज्ञ नहीं बल्कि,विज्ञान के मार्गदर्शक थे उनके विचार और सिद्धांत आज भी उतने प्रासंगिक है और गर्भ की बात यह है वह भारतीय थे

Good
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